आमतौर पर लोगों खासतौर पर महिलाओं के मन में नॉर्मल डिलीवरी से अलग सिजेरियन से मां बनने को लेकर कई तरह की कंफ्यूजन होती है। उन्हें लगता है नॉर्मल डिलीवरी से अलग अगर किसी महिला की सिजेरियन (सी सेक्शन) होती है, तो उसे आगे जाकर कई हेल्थ इश्यू हो सकते हैं जबकि मेडिकल एक्सपर्ट ऐसा नहीं मानते। आइए, जानते हैं सिजेरियन से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई क्या है ?
मिथक : सिजेरियन होने के बाद दूसरा बच्चा कभी नॉर्मल डिलीवरी से नहीं होता।
सच : यह बात बिल्कुल भी सही नहीं है।सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी के लिए कई मेडिकल कंडीशन को देखकर ही फैसला लिया जाता है कि गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी होगी या नॉर्मल।वहीं, बच्चे को जन्म देने की कॉम्पलिकेशन को भी देखा जाता है।
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मिथक : सिजेरियन से मां-बच्चे की सेहत पर असर पड़ता है।
सच : ऐसा कुछ भी नहीं है कि सिजेरियन के बाद मां और बच्चे पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।नॉर्मल या सिजेरियन दोनों ही तरह की डिलीवरी में मां और बच्चे दोनों को प्यार और एक्सट्रा केयर की जरुरत होती है।
मिथक : सिजेरियन के बाद ब्रेस्टफीडिंग में दिक्कत होती है।
सच : सिजेरियन के बाद ब्रेस्टफीडिंग में होने वाली दिक्कत सबसे बड़ा झूठ है।सिजेरियन के बाद मां की दूध मिलाने की क्षमता या दूध पर कोई असर नहीं पड़ता।सिजेरियन एक प्रक्रिया है, बच्चे को मां के गर्भ से बाहर निकालने की, ऐसे में यह सिजेरियन हो या नॉर्मल डिलीवरी दोनों ही प्रक्रिया में मां कोई सीरियस हेल्थ इश्यू न होने पर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करा सकती है।
मिथक : सिजेरियन से पैदा होने वाले बच्चे और मां के बीच बॉन्डिंग नहीं होती।
सच : नवजात बच्चे की मां से प्राकृतिक तौर पर बॉन्डिंग मजबूत ही होती है क्योंकि बच्चा मां के साथ सबसे ज्यादा वक्त बिताता है और मां से उसे सबसे ज्यादा केयर मिलती है, ऐसे में बच्चा सिजेरियन से पैदा हो या नॉर्मल डिलीवरी से, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।
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